कुम्हरार विधानसभा में सियासी सरगर्मी, कायस्थ कार्ड बनाम दलित-पिछड़ा समीकरण पर टिकी नजरें।
बिहार में चुनावी माहौल अपने चरम पर है। सभी राजनीतिक दल अपने संगठन को मज़बूत करने और जनता से जुड़ने में जुट गए हैं।
इसी बीच कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र में सियासी हलचल और तेज़ हो गई है।
कायस्थ कार्ड के जरिए प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे या फिर दलित–महादलित, पिछड़ा–अति पिछड़ा समीकरण का सहारा लेना होगा — इस सवाल पर पूरे क्षेत्र की राजनीति टिकी हुई है।
जन सुराज पार्टी ने भी इस विधानसभा क्षेत्र में सक्रियता तेज़ कर दी है। सदस्यता अभियान के तहत पार्टी लगातार लोगों से जुड़ रही है। इसी क्रम में आनंद किशोर दीपक को भावी प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा है, जो लगातार कुम्हरार की जनता से संपर्क कर रहे हैं।
आनंद किशोर दीपक ने कहा कि—
“सिर्फ़ एक वर्ग नहीं, बल्कि सभी वर्गों पर ध्यान देना ज़रूरी है। खासकर उनपर, जो अब भी पिछड़े हुए हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि जनता को अब एक नई पार्टी को मौका देना चाहिए।
“एक बार पाँच साल के लिए जन सुराज पार्टी को अवसर दीजिए… हम न केवल कुम्हरार विधानसभा, बल्कि पूरे शहर को चकाचक कर देंगे।”
कुम्हरार की जनता किसे मौका देती है — यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि जातीय समीकरण और प्रत्याशियों का जनसंपर्क ही यहाँ चुनावी जीत की कुंजी साबित होंगे।
