कटिहार में एक बार फिर धर्मांतरण का मुद्दा सुर्खियों में है। जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले आदिवासी समुदाय के सैकड़ों लोग समाहरणालय के सामने जुट गए। हाथों में बैनर-पोस्टर, जमकर नारे और चेहरे पर गुस्सा, धरना प्रदर्शन का नजारा देखते ही बन रहा था। आरोप साफ था। ईसाई मिशनरियों की ओर से प्रलोभन देकर आदिवासी समाज का धर्मांतरण कराया जा रहा है।
मंच के जिला संयोजक विकास सोरेन ने सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा की आर्थिक मदद, बच्चों की पढ़ाई, मुफ्त इलाज और तरह-तरह के प्रलोभन देकर आदिवासियों को उनकी जड़ों से तोड़ने की साजिश की जा रही है। यह सिर्फ धर्मांतरण नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान पर सीधा हमला है। प्रदर्शनकारी बताते हैं कि यह खेल नया नहीं है। 10 अगस्त को ही कटिहार के टीवी टावर मोहल्ले में कथित तौर पर प्रार्थना सभा के नाम पर दर्जनों आदिवासी परिवारों को धर्मांतरण के लिए तैयार किया जा रहा था। जब स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो मामला तूल पकरा और राजनीति का रंग चढ़ गया। इसी कड़ी में आदिवासी समुदाय ने कटिहार जिलाधिकारी के जरिए राष्ट्रपति को ग्यापन सौंपा। उनकी मांग है कि इस पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए। साथ ही धर्मांतरण की गतिविधियों पर तत्काल रोक लगे। धरना में शामिल लोगों ने सरकार को चेतावनी भी दी कि अगर उनकी आवाज नहीं सुनी गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मंच के नेताओं का कहना है कि आदिवासी समाज की आस्था और परंपराओं के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कटिहार में धर्मांतरण का यह मामला अब सिर्फ एक स्थानीय विवाद नहीं रहा। आदिवासी समाज इसे अपनी अस्मिता से जोरकर देख रहा है। सवाल बरा है क्या सरकार उनकी गुहार सुनेगी या फिर यह बवाल और बरा रूप लेगा। कुल मिलाकर कटिहार में धर्मांतरण के मुद्दे पर सियासी पारा चढ़ चुका है और आने वाले दिनों में यह आग बिहार की राजनीति में और भरक सकती है।
