बिहार में पूर्ण रूप से मद्य निषेध कानून लागू है, लेकिन इसके बावजूद कुछ जनप्रतिनिधि ही इस कानून को खुलेआम ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला पूर्णिया जिले के जलालगढ़ प्रखंड से सामने आया है, जहां प्रखंड प्रमुख निखिल किशोर उर्फ भिखारी यादव को शराब के नशे में गिरफ्तार किया गया है। इस घटना से जिले में राजनीतिक और सामाजिक लोगों में खासा हड़कंप मच गया है।

बताया जा रहा है कि प्रखंड प्रमुख निखिल किशोर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह शराब के नशे में धुत होकर कुछ युवकों के साथ मारपीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वायरल वीडियो के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।

सूचना के अनुसार, रविवार की देर शाम जलालगढ़ स्टेडियम में दौड़ने आए एक युवक के साथ प्रखंड प्रमुख शराब के नशे में मारपीट कर रहे थे। इस दौरान जलालगढ़ के मुखिया प्रतिनिधि राजकुमार दास ने इसकी सूचना जलालगढ़ थाना को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को हिरासत में लेकर पूर्णिया उत्पाद विभाग थाना लाया गया।

उत्पाद विभाग के थाना में एएसआई दयानंद सिंह द्वारा कराई गई जांच में प्रखंड प्रमुख निखिल किशोर के शरीर में 87 प्रतिशत अल्कोहल की मात्रा पाई गई, जबकि मुखिया प्रतिनिधि राजकुमार दास के शरीर में 0 प्रतिशत अल्कोहल पाया गया। इसके बाद प्रखंड प्रमुख को जलालगढ़ थाना ले जाया गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया की जा रही है।

मुखिया प्रतिनिधि राजकुमार दास ने बताया कि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी प्रखंड प्रमुख निखिल किशोर का एक पुराना वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह शराब पीते हुए और ग्रामीणों से झगड़ा करते हुए नजर आए थे। इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारन लोगों ने नाराजगी भी जाहिर की थी।

वही इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब पंचायती राज व्यवस्था के शीर्ष जनप्रतिनिधि ही शराबबंदी जैसे सख्त कानून की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं, तो आम जनता से कानून पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है। साफ है कि यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनप्रतिनिधियों की नैतिक जिम्मेदारी और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
