कटिहार में विकास पर सवाल, शव लेकर नदी पार करते दिखे ग्रामीण
विकास और बुनियादी सुविधाओं के दावों के बीच कटिहार जिले के फलका प्रखंड के मोरसंडा गांव से सामने आई एक तस्वीर ने ग्रामीण इलाकों की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है। यहां एक व्यक्ति की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए शव को कंधे पर उठाकर कमला नदी पार करने को मजबूर हुए। पुल नहीं होने के कारण लोगों ने लगभग तैरते हुए नदी पार कर शव को श्मशान घाट तक पहुंचाया।
मृतक की पहचान अरविंद मंडल के रूप में हुई है। उनके निधन के बाद जब अंतिम संस्कार की तैयारी की गई तो ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या नदी पार करने की थी। गांव को दूसरे छोर से जोड़ने वाला कोई पुल नहीं होने के कारण लोगों ने शव को कंधे पर लेकर पानी के बीच से गुजरते हुए नदी पार की। इस दौरान का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। आजादी के दशकों बाद भी मोरसंडा और आसपास के गांवों की तस्वीर नहीं बदली है। कमला नदी के दोनों किनारों पर बड़ी आबादी निवास करती है, लेकिन पुल नहीं होने के कारण लोगों को कई किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। अन्यथा नदी पार करने के लिए पानी में उतरना ही एकमात्र विकल्प बचता है। वही ग्रामीणों ने कहा की चुनाव से पूर्व पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने भी कहा था की चुनाव जीतने के बाद पुल बना दिया जाएगा परन्तु अब तक कोई पुल का निर्माण कार्य नहीं किया गया। हमारे क्षेत्र के सांसद होने के बाद भी हमारी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार सरकारी स्तर पर आवागमन की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। एक निजी नाव संचालित होती है, लेकिन उस पर अक्सर ओवरलोडिंग रहती है। कई बार हादसे की स्थिति बन चुकी है, जिसके कारण लोग उस सेवा का उपयोग करने से भी कतराते हैं। मजबूरी में ग्रामीण रोजमर्रा के कामों के लिए भी नदी को पैदल या तैरकर पार करते हैं।
बाढ़ के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। ग्रामीण बताते हैं कि कमला नदी में जलस्तर बढ़ने पर गांव का संपर्क लगभग कट जाता है। ऐसे समय में स्थानीय लोग आपसी चंदा जुटाकर अस्थायी चचरी पुल बनाते हैं, जिससे किसी तरह आवागमन संभव हो पाता है। फिलहाल पानी कम होने के कारण लोग सीधे नदी पार कर रहे हैं।
यह क्षेत्र लोकसभा क्षेत्र के हिसाब से पूर्णिया और विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से कटिहार जिले के कोढ़ा विधानसभा क्षेत्र में आता है। मामले पर स्थानीय भाजपा विधायक कविता पासवान ने कहा कि वह पहले भी विधानसभा में इस पुल निर्माण का मुद्दा उठा चुकी हैं। उनके अनुसार जिला स्तर से भेजी गई योजना में तकनीकी और प्रशासनिक खामियों के कारण पुल का निर्माण नहीं हो सका। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस महत्वपूर्ण पुल के निर्माण की दिशा में जल्द पहल की जाएगी और कार्य शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।
बिहार में सड़कों और पुल-पुलियों के विस्तार को विकास का प्रतीक बताया जाता है, लेकिन मोरसंडा गांव की यह तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। एक ओर विकास के दावे हैं, वहीं दूसरी ओर अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्य के लिए भी ग्रामीणों को शव लेकर नदी पार तैरना पड़ रहा है। यह दृश्य न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि विकास मॉडल के सामने भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
