मिल्लिया कॉन्वेंट में नन्हे वैज्ञानिकों का कमाल, साइंस एग्जीबिशन में आकर्षण का केंद्र बने बच्चों के नवाचार
पूर्णिया, संवाददाता।
पूर्णिया के रामबाग स्थित मिल्लिया कॉन्वेंट स्कूल में नर्सरी से कक्षा पांच तक के विद्यार्थियों द्वारा आयोजित साइंस एग्जीबिशन में बच्चों की प्रतिभा और वैज्ञानिक सोच का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। विभिन्न कक्षाओं के बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता का परिचय देते हुए कई उपयोगी एवं आकर्षक वैज्ञानिक मॉडल (प्रोटोटाइप) तैयार किए। प्रदर्शनी में छात्रों के उत्साह ने अभिभावकों, शिक्षकों और अतिथियों का मन मोह लिया।
प्रदर्शनी में बच्चों ने स्मार्ट सिटी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, मैनुअल ट्रिगर ऑटोमेटिक क्लोथिंग सिस्टम, एयर कूलर, कम्युनिटी हेल्पर्स, इंडियन सोल्जर, डे-नाइट मॉडल, पौधों के विभिन्न भाग, सौरमंडल, सर्किट सैंपल, ज्वालामुखी (वॉल्केनो), रोबोटिक हैंड, वाटर पॉल्यूशन कंट्रोल सहित कई विज्ञान आधारित मॉडल प्रस्तुत किए। प्रत्येक मॉडल के पीछे बच्चों की कई दिनों की मेहनत और टीमवर्क स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।
बच्चों ने बताया कि अधिकांश प्रोजेक्ट तीन से चार विद्यार्थियों की टीम ने मिलकर तैयार किए हैं। कई मॉडलों को बनाने में 10 से 15 दिनों का समय लगा। छात्रा अंशिका कुमारी ने अपने “वाटर पॉल्यूशन” प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए बताया कि इसका उद्देश्य नदियों के जल प्रदूषण को कम करने के उपायों को दर्शाना है।
वहीं स्मार्ट सिटी मॉडल प्रस्तुत करने वाले बच्चों ने बताया कि इस परियोजना में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रदूषण कम करने तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित शहर की अवधारणा को दर्शाया गया है। इसके अलावा इंडियन सोल्जर थीम पर आधारित मॉडल में सीमा सुरक्षा, सैटेलाइट, विमान, प्रकाश व्यवस्था और राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
इस अवसर पर आईपीएस स्कूल की प्राचार्या किस्मत आरा ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच और मेहनत वास्तव में प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि नर्सरी के बच्चों द्वारा भी इतने उत्कृष्ट मॉडल तैयार करना आश्चर्यजनक है। उन्होंने सभी प्रतिभागी बच्चों को अपनी ओर से “10 में 10 अंक” देने की बात कही और कहा कि यह बच्चों की नवाचार क्षमता तथा मिल्लिया कॉन्वेंट की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का परिणाम है।
स्कूल के प्रधानाध्यापक वाई. एन. झा ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य बच्चों में प्रारंभिक स्तर से ही वैज्ञानिक सोच, नवाचार और रचनात्मकता विकसित करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रोत्साहित करना समाज की जिम्मेदारी है, ताकि वे भविष्य में बेहतर वैज्ञानिक, शोधकर्ता और जिम्मेदार नागरिक बन सकें।
प्रदर्शनी देखने पहुंचे अभिभावकों ने भी स्कूल प्रबंधन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के साइंस एग्जीबिशन से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें नई-नई चीजें सीखने तथा बनाने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक एवं बौद्धिक विकास के लिए इस तरह के आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होने चाहिए।
