नमाजियों से भरी नाव दास नदी में पलटी, तैरकर बचाई जान।

जर्जर नाव बनी हादसे की वजह, ग्रामीणों ने नई नाव और पुल निर्माण की उठाई मांग।

अमौर (पूर्णिया)। बकरीद की नमाज अदा कर लौट रहे नमाजियों से भरी एक नाव अमौर थाना क्षेत्र के बागवाना घाट पर दास नदी में पलट गई। हालांकि नाव पर सवार सभी नमाजी, जिनमें बच्चे, बुजुर्ग और युवा शामिल थे, तैरकर सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन एक बड़ा हादसा टल गया।

जानकारी के अनुसार बागवाना गांव के लोग बकरीद की नमाज पढ़ने के लिए नदी के पूरब पार गए थे। नमाज के बाद वापस लौटने के दौरान जर्जर नाव में तकनीकी खराबी आ गई। नाव के ऊपरी हिस्से के क्षतिग्रस्त होने के कारण उसमें पानी भरने लगा। नाविक ने किसी तरह नाव को किनारे तक लाने का प्रयास किया, लेकिन किनारे पहुंचते ही नाव पानी में डूब गई। इसके बाद सभी लोगों ने तैरकर अपनी जान बचाई।

समाजसेवी मुकर्रम हुसैन ने बताया कि नाव पर सवार सभी लोग सुरक्षित हैं, लेकिन यह घटना प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 से बागवाना घाट का संचालन सरकारी स्तर पर किया जा रहा है, लेकिन पिछले 10 वर्षों में यहां नई नाव उपलब्ध नहीं कराई गई। पुरानी और जर्जर नावों के सहारे हजारों लोग रोजाना आवागमन करने को मजबूर हैं।

उन्होंने बताया कि ज्ञानडोव पंचायत के बागवाना वार्ड 8 और 9, रंगरैया लालटोली पंचायत के वार्ड 8, 9 और 13 तथा खाबी महिनगांव पंचायत के करीब 5 हजार लोग प्रतिदिन इसी घाट का उपयोग करते हैं। इसके बावजूद घाट पर सुरक्षित नाव की व्यवस्था नहीं की गई है।

घटना के 36 घंटे बाद भी किसी प्रशासनिक अधिकारी के मौके पर नहीं पहुंचने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। आम आदमी पार्टी के विधानसभा अध्यक्ष भाई अबू कैस ने प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद अधिकारियों का मौके पर नहीं पहुंचना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की जांच कर नई नाव उपलब्ध कराने तथा स्थायी समाधान के लिए पुल निर्माण कराने की मांग की।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अमौर विधानसभा क्षेत्र में जहां-जहां नाव की आवश्यकता है, वहां यदि एक महीने के भीतर पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई तो लोग संवैधानिक दायरे में रहकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

वहीं, अंचलाधिकारी धीरेंद्र कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है और सभी लोग सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकारी स्तर पर नई नाव खरीदने की कोई योजना नहीं है। यदि किसी व्यक्ति के पास निजी नाव है तो आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उसे संचालन की अनुमति दी जा सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते नई नाव और पुल की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

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