सायरन बजते ही थम गई 6 जिलों की रफ्तार, अंधेरे में डूबे बाजार और सड़कें
पटना, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया समेत बिहार के छह जिलों में गुरुवार शाम केंद्रीय गृह मंत्रालय के आह्वान पर ब्लैक आउट मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। शाम ठीक 7 बजे सायरन बजते ही शहरों की रफ्तार थम गई और चारों ओर अंधेरा छा गया। लोगों ने अपने घरों, दुकानों, होटलों और वाहनों की लाइटें बंद कर दीं। यहां तक कि मोबाइल की फ्लैशलाइट भी बंद रखी गई।
पूर्णिया में शाम 7 बजे से 7:10 बजे तक पूर्ण ब्लैक आउट रखा गया। इस दौरान नागरिकों ने प्रशासन के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया। सड़क पर चल रहे वाहनों ने भी अपनी हेडलाइट बंद कर दी। वहीं अस्पतालों में आपात स्थिति से निपटने को लेकर घायल लोगों को सुरक्षित पहुंचाने का मॉक अभ्यास भी किया गया।
पूर्णिया के प्रभारी जिलाधिकारी अंजनि कुमार ने बताया कि मॉक ड्रिल पूरी तरह सफल रही और जिले के लोगों ने अनुशासन का परिचय दिया। उन्होंने इसके लिए आम जनता का धन्यवाद भी किया। वही इस मॉक ड्रिल में शामिल हुए एसडीआरएस के अधिकारी और सदर एसडीओ स्वेत दीक्षित ने कहा की आपातकाल और स्तिथि से निपटने को लेकर ब्लैक ऑउट मॉकड्रिल किया गया था जिसमें पूर्णिया की जनता के सहयोग से सफल किया गया। वही जनता में शामिल अनिल चौधरी जी ने बताया की ब्लैक ऑउट मॉकड्रिल से आम लोगों को युद्ध जैसी स्तिथि में कैसे बचाव किया जाए इसको लेकर प्रशासन ने मॉक अभ्यास भी किया गया। जो बिलकुल ही सफल रहा।
वहीं कटिहार में भी मॉक ड्रिल के दौरान कुछ देर के लिए ऐसा माहौल बन गया मानो शहर किसी बड़े खतरे का सामना कर रहा हो। शाम 7 बजे सायरन बजते ही सड़कों पर वाहन रुक गए, दुकानों की बत्तियां बुझ गईं और पूरा शहर अंधेरे में डूब गया। प्रशासन की ओर से लोगों को बताया गया कि एयर स्ट्राइक जैसी स्थिति में तुरंत सभी लाइटें बंद कर देना कितना जरूरी होता है ताकि दुश्मन को लोकेशन का पता न चल सके और जान-माल का नुकसान कम हो।
कटिहार के अलग-अलग इलाकों में नागरिक सुरक्षा टीम और प्रशासन ने आग लगने, मलबे में फंसे लोगों को बचाने और आपदा से निपटने के तरीके का प्रदर्शन भी किया। यह मॉक ड्रिल लोगों के लिए सिर्फ अभ्यास नहीं बल्कि आपदा के समय सतर्क रहने का बड़ा संदेश बनकर सामने आया।
प्रशासन की इस पहल को लोगों ने सराहा और भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम चलाने की मांग की।
