पूर्णिया राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) में स्वास्थ्य विभाग द्वारा विदेश से एमबीबीएस (एफएमजी) कर लौटे 100 अभ्यर्थियों की इंटर्नशिप के लिए भेजी गई सूची में एक कथित फर्जी डिग्री का मामला सामने आया है। दस्तावेजों की जांच के दौरान एक अभ्यर्थी के प्रमाणपत्र में गंभीर गड़बड़ी मिलने के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। मामले की जांच जारी है।
जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने 100 एफएमजी अभ्यर्थियों की सूची यह उल्लेख करते हुए जीएमसीएच भेजी थी कि सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की आवश्यक जांच पूरी कर ली गई है। इसके बावजूद जीएमसीएच प्रशासन ने अपने स्तर पर सभी प्रमाणपत्रों का पुनः सत्यापन शुरू किया।
इसी दौरान एक अभ्यर्थी की मार्कशीट पर लगे क्यूआर कोड की जांच की गई। क्यूआर कोड स्कैन करने पर उसमें किसी अन्य व्यक्ति का विवरण सामने आया। इसके बाद विस्तृत जांच में पता चला कि संबंधित अभ्यर्थी ने कथित रूप से मूल प्रमाणपत्र में नाम और अन्य विवरण बदलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किया था।
जीएमसीएच प्रशासन के अनुसार, पकड़े गए अभ्यर्थी की पहचान रोहतास निवासी अदनान अहमद के रूप में हुई है। वह कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने का दावा करते हुए इंटर्नशिप के लिए पूर्णिया जीएमसीएच पहुंचा था। जांच में सामने आया कि जिस प्रमाणपत्र का उसने उपयोग किया, उसका मूल धारक दीक्षित मानस नामक छात्र है। आरोप है कि उसी प्रमाणपत्र में हेरफेर कर उसे अपने नाम से प्रस्तुत किया गया।
मामले का खुलासा होने के बाद जीएमसीएच के प्रधानाचार्य ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने अदनान अहमद को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अब मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग तथा न्यायालय द्वारा आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पूछताछ के दौरान अदनान अहमद ने बताया कि उसने कजाकिस्तान के अल्माटी स्थित एक मेडिकल संस्थान से एमबीबीएस की पढ़ाई की है। उसका कहना है कि इंटर्नशिप के लिए कॉलेज से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं मिलने के कारण उसने यह कदम उठाया।
यह मामला सामने आने के बाद विदेश से मेडिकल की पढ़ाई कर लौटने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फर्जी डिग्रीधारी बिना जांच के चिकित्सा सेवा में शामिल हो जाएं तो इससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई तथा सभी दस्तावेजों का सख्त सत्यापन आवश्यक है।
