विक्रमशिला सेतु एक बार फिर खतरे की जद में आ गया है। रविवार देर रात करीब 12:50 बजे पुल के पिलर नंबर 133 के पास सड़क का एक बड़ा स्लैब अचानक टूटकर गंगा नदी में गिर गया। घटना के समय पुल पर कई वाहन मौजूद थे, लेकिन मौके पर तैनात पुलिस और प्रशासन की सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया।
वही हमारे रिपोर्टर रविंद्र शर्मा ने घटना स्थल का जायजा लिया और बताया की……
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक जोरदार आवाज के साथ पुल का हिस्सा धंस गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, पुलिस ने तुरंत सभी वाहनों को पीछे हटाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। दोनों छोर पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को जांच के लिए बुलाया गया है।
वहीं, एसएसपी प्रमोद यादव ने बताया कि सभी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों की ओर डायवर्ट किया जा रहा है। अब भागलपुर से नवगछिया और सीमांचल जाने वाले लोगों को मुंगेर और सुल्तानगंज के रास्ते यात्रा करनी होगी।
विक्रमशिला सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली एक अहम कड़ी है। इसके बंद होने से न केवल आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
गौरतलब है कि मार्च महीने में भी पुल के पाया नंबर 17, 18 और 19 की सुरक्षा दीवार को लेकर सवाल उठे थे। उस समय पुल निर्माण विभाग की टीम ने भी जांच किया था।
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब हाल ही में पुल का जांच भी किया गया, तो आखिर इतनी बड़ी घटना कैसे हो गई?
वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के कार्यकाल में इस पुल का उद्घाटन हुआ था। उस वक्त पुल निर्माण विभाग ने पुल की क्षमता को देखते हुए पुल को 40 वर्षों तक सुरक्षित माना था।
लेकिन मौजूदा घटना ने उस दावे पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल वैकल्पिक मार्गों का ही उपयोग करें। फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जांच रिपोर्ट के बाद ही पता चल पाएगा की पुल कब चालू होगा, फ़िलहाल लम्बे समय के लिए सीमांचल का भागलपुर से सीधा यातायात का संपर्क टूट गया है।
