पूर्णिया को 15 सितंबर को मिल सकती है कोसी-मेची लिंक की सौगात, सीमांचल के किसानों और श्रमिकों के लिए बन सकती है जीवनदायिनी योजना

बाढ़ और पलायन की त्रासदी से वर्षों से जूझ रहे पूर्णिया सहित सीमांचल के किसानों को अब राहत मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 15 सितंबर को कोसी-मेची लिंक परियोजना की सौगात पूर्णिया से देने जा रहे हैं। यह परियोजना सीमांचल के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

कोसी और मेची नदियों को आपस में जोड़ने वाली यह महत्वाकांक्षी योजना करीब दो लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि को बाढ़ के खतरे से मुक्ति दिलाएगी, जिससे क्षेत्र के किसान साल में कम से कम तीन फसल लेने में सक्षम होंगे। इससे यहां के श्रमिकों का पलायन रुकने की भी उम्मीद जताई जा रही है।

बदल जाएगा सीमांचल का कृषि परिदृश्य

कोसी-मेची लिंक परियोजना को लेकर बायसी अनुमंडल एवं रूपौली प्रखंड के कई किसानों और श्रमिकों से बात की। अधिकतर किसानों का कहना है कि यह परियोजना बिहार के लिए पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र की तरह कृषि समृद्धि का द्वार खोलेगी।

स्थानीय किसान रामविलास मंडल ने कहा:

“अब तक हम बाढ़ के डर से मुश्किल से दो फसल ही ले पाते थे, लेकिन कोसी-मेची लिंक बन जाने से न केवल बाढ़ का खतरा टलेगा, बल्कि साल में तीन फसलें उगा सकेंगे।”

श्रमिकों को मिलेगा स्थायी रोजगार, थमेगा पलायन

प्रवासी श्रमिक मो. शमीम ने कहा:

“हर साल बाढ़ में खेत डूब जाता है। मजबूरी में हम पंजाब और हरियाणा कमाने जाते हैं। अगर यही रोजगार यहां मिल जाएगा, तो कौन अपने घर-परिवार से दूर रहना चाहेगा?”

कोसी-मेची लिंक परियोजना के शुरू होने से श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध हो सकेगा। यह परियोजना न केवल कृषि उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि इससे जुड़ी लघु और कुटीर उद्योगों को भी बल मिलेगा, जिससे सीमांचल का सामाजिक और आर्थिक चेहरा बदल सकता है।

प्रधानमंत्री की पूर्णिया यात्रा से जुड़ी बड़ी उम्मीदें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 सितंबर को पूर्णिया आकर इस योजना की औपचारिक घोषणा करेंगे। इस दौरान वे पूर्णिया एयरपोर्ट का उद्घाटन, वंदे भारत ट्रेन की सौगात, और अन्य विकास योजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे।

यह दौरा न केवल सीमांचल बल्कि पूरे बिहार के लिए विकास की नई रोशनी लेकर आने वाला माना जा रहा है।

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