मेयर को सताने लगा सत्ता जाने का डर, उप महापौर और पार्षद ने नगर निगम की खोली पोल, देखें रिपोर्ट।

आगामी बिहार विधानसभा चुनाव का असर इन दिनों मोतिहारी नगर निगम पर भी देखने को मिल रहा है। निगम की राजनीति इन दिनों इसी के इर्द-गिर्द घूम रही है। यही वजह है कि नगर निगम में पिछले डेढ़ साल से उथल-पुथल मची हुई है। नगर निगम मोतिहारी में जनप्रतिनिधियों के बीच दो दलीय राजनीति के कारण आज इस लड़ाई में सबसे बड़ा नुकसान मोतिहारी की जनता को उठाना पड़ रहा है। इस विवाद ने मोतिहारी शहर के विकास की गति को धीमा कर दिया है। निगम बोर्ड और एक पार्षद की लड़ाई में 45 वार्डों का विकास प्रभावित हो गया है। इसमें करीब 49 करोड़ की गली-नाली निर्माण की 74 बड़ी योजनाएं अभी भी फाइलों में अटकी हुई हैं। विभाग ने करीब दो माह पहले इन योजनाओं के टेंडर पर रोक लगा दी थी।

बता दें तो कि मोतिहारी नगर निगम में दो दलीय राजनीति को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है और दोनों दलों की आपसी लड़ाई का नतीजा यह है कि आम लोगों और शहर का विकास लगातार बाधित हो रहा है। इसी कड़ी में एक बार फिर नगर निगम सुर्खियों में है जहां मोतिहारी मेयर प्रीति गुप्ता को पद से हटाए जाने की आशंका जताई जा रही है। जिलाधिकारी के नाम से जारी एक पत्र वायरल है जिसमें कहा गया है कि नगर निगम की मेयर को कभी भी उनके पद से हटाया जा सकता है, जिससे एक बार फिर विवाद गहराता जा रहा है।

नगर निगम की मेयर प्रीति गुप्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये अपने विरोधियों के खिलाफ कई संगीन व सनसनीखेज आरोप लगाए है और कहा है कि जब से मैं नगर निगम की मेयर बनी हूँ तब से मुझे व मेरे पति को बिरोधियो द्वारा लगातार परेशान किया जा रहा है, झूठे मुकदमा में फंसाया जा रहा है और अब मुझे पद से हटाने की एक गहरी साजिश रची जा रही है । उन्होंने अपने बिरोधियो पर आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले दिनों उनके प्रतिनिधि मनीष जायसवाल के मोबाइल पर एक वार्ड पार्षद के पति ने एक डॉक्यूमेंट लेटर भेजा जो कि जिलाधिकारी के नाम से था और उसे पटना शहरी आवास बिभग के सचिव के पास भेजा जाने वाला था । उसने साफ लिखा है कि क्यों नही आपको पदमुक्त किया जाय जबकि उसमे कही भी पत्रांक दिनांक नही लिखा हुआ है । अब सवाल ये उठता है कि आखिर जिलाधिकारी के कार्यलय से ये लेटर वार्ड पार्षद के पति के पास कैसे पहुंचा । उन्होंने ये भी कहा कि एक वार्ड पार्षद के एक शिकायत के आधार पर मेरे ऊपर बिना जांच किये ऐसी कार्यवाही की धमकी क्यों दी जा रही है जबकि मुझसे जो जबाब मांगा गया है उसका जबाब मैं कल देने वाली हूँ, तो फिर किस आधार पर पहले से ही मेरे ऊपर पद से हटाने की साजिश रची जा रही है ।।

वही उन्होंने आरोप लगाया कि जब मैंने अधिकारियों को ये बता दिया है कि मैं इसका जबाब 15 दिनों में दूंगी तो उसे अमान्य कर दिया गया है ।सवाल ये उठता है मेरे जबाब देने से 22 दिन पूर्व कैसे ये लेटर तैयार हो गया और राकेश सिंह के पास कैसे पहुंचा ये जांच का विषय है । ये एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है । कुछ बिरोधी मुझे मेरे पद से हटाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रहे है और बिकास कार्य को वाधित कर रहे है। पिछले दिनों 45 वार्ड में लगभग 56 करोड़ का कार्य होना था उसे भी साजिश के तहत रोक दिया गया। ये वही लोग हैं जो इस मामले में शिकायतकर्ता भी हैं। अंत में, महापौर प्रीति गुप्ता ने भावुक मन से जनता से पूछा कि हमें यह लड़ाई लड़नी चाहिए या आत्मसमर्पण कर देना चाहिए।

मेयर प्रीति गुप्ता के प्रेस कॉन्फ्रेंस और आरोप लगाने के बाद मोतिहारी नगर निगम राजनीति का आंखड़ा बन गया है। वही आरोप प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है वही मोतिहारी नगर निगम के डिप्टी मेयर लालबाबू प्रसाद और वार्ड पार्षद धीरज जायसवाल के द्वारा मेयर प्रीति गुप्ता पर घोटाला, अनिमियता, धमकी और वितीय अनिमियता सहित कई गंभीर आरोप लगाए है। वार्ड पार्षद धीरज जायसवाल ने कहा कि सभी नगर निगम का बजट दिन प्रतिदिन बढ़ता है लेकिन मोतिहारी नगर निगम के गठन होने के बाद भी लगातार उसके बजट का आकार कम हुआ है। वार्ड पार्षदों को न तो योजना का लाभ मिल रहा है नहीं वार्ड में कोई विकास कार्य दिख रहा है। वैसी स्थिति में नगर निगम भगवान भरोसे चल रहा है वहीं वार्ड पार्षद धीरज जायसवाल ने मेंयर प्रीती गुप्ता पर आरोप लगाते हुए कहा कि वित्तीय अनियमियता हुई है सामान की खरीदारी में गड़बड़ी, नगर निगम के साफ सफाई की व्यवस्था के साथ-साथ विभिन्न यंत्र की खरीदारी में गड़बड़ी हुई है वार्ड के विकास में इनकी कोई रुचि नहीं है बल्कि कमीशन का खेल चल रहा है और 56 करोड़ की योजना में 11 करोड़ की कमीशन के लिए इन्होंने पूरे मोतिहारी के वार्ड का विकास रोक दिया है चुनाव में फंडिंग करने के लिए इन्होंने इस तरह के काम किए है इसलिए इसकी गहन जांच होनी चाहिए । आगे उन्होंने क्या कुछ कहा जरा सुनिए

बता दें की नगर विकास एवं आवास विभाग ने पुरे मामले की जांच की जिम्मेवारी डीएम को सौंपी थी, जो अबतक जांच के प्रक्रियाधीन है. जून माह में प्रकाशित योजना शर्तों के अनुसार, अधिकांश योजनाओं का निर्माण कार्य छह माह के भीतर पूरा किया जाना था। ऐसे में यदि समय पर टेंडर हो जाता, तो शहर की एक बड़ी आबादी को अगले तीन-चार माह में पक्की सड़क और नालियों की समस्या से राहत मिल जाती। मोतिहारी भारत वन हिंदी से प्रतीक सिंह की रिपोर्ट

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