संजय कुमार, ब्यूरो पटना। बिहार सरकार अब गंगा नदी में जमा होने वाली मिट्टी और गाद को समस्या के बजाय संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गाद प्रबंधन की राज्यस्तरीय नीति की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार आम लोगों और ईंट-भट्ठा संचालकों को गंगा की मिट्टी मात्र 10 रुपये में उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि आमतौर पर खेतों से मिट्टी लेने के लिए लोगों को 300 से 400 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में गंगा की गाद से मिलने वाली मिट्टी कम कीमत पर उपलब्ध होने से आम लोगों और ईंट-भट्ठा कारोबारियों को राहत मिल सकती है।

गाद प्रबंधन से बाढ़ पर नियंत्रण की कोशिश

मुख्यमंत्री के मुताबिक, बिहार सरकार ने गाद प्रबंधन (सिल्ट मैनेजमेंट) को लेकर राज्यस्तरीय नीति तैयार की है। इसके तहत गंगा सहित दूसरी नदियों में जमा गाद को वैज्ञानिक तरीके से निकाला जाएगा और उसका उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य नदियों के प्रवाह को बेहतर बनाना और गाद जमाव से पैदा होने वाली समस्याओं को कम करना है।

सड़क निर्माण में भी होगा गंगा की मिट्टी का इस्तेमाल

सरकार गंगा की गाद और मिट्टी का इस्तेमाल आम लोगों की जरूरतों के अलावा सड़क निर्माण और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी करना चाहती है। इसके लिए बिहार सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के बीच समझौता करने की योजना है।

नदियों के तटबंधों पर लगेंगे सोलर पैनल

मुख्यमंत्री ने गंगा और अन्य नदियों के तटबंधों पर सौर ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इसके तहत तटबंधों का बेहतर उपयोग कर ग्रीन एनर्जी उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना है।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य नदी की गाद का उपयोग, बाढ़ प्रबंधन, निर्माण कार्यों में संसाधनों की उपलब्धता और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। हालांकि, 10 रुपये में मिट्टी उपलब्ध कराने की व्यवस्था के वितरण केंद्र, मात्रा और प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी सामने आना बाकी है।