पूर्णिया के कृत्यनानाद नगर स्थित इथेनॉल फैक्ट्री में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। काम के दौरान एक मजदूर की दबकर मौत हो गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।
मृतक की पहचान बोधि मुनि के रूप में हुई है, जो पिछले करीब 8 महीनों से फैक्ट्री में मजदूरी कर रहा था। परिजनों के मुताबिक, काम के दौरान चावल के बोड़े (भूसी) का भारी छल्ला अचानक गिर गया, जिसकी चपेट में आकर मजदूर दब गया।
हादसे के बाद फैक्ट्री में अफरा-तफरी मच गई। सहकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए मलबे से निकालकर उसे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया, लेकिन मेडिकल कॉलेज पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
फैक्ट्री पर सवाल:
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इथेनॉल फैक्ट्री में पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद मजदूरों की सुरक्षा को लेकर ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं। बार-बार हो रहे हादसे फैक्ट्री प्रबंधन की लापरवाही की ओर इशारा कर रहे हैं।
प्रबंधन का बयान:
फैक्ट्री के एचआर मैनेजर ने कहा है कि मृतक के परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, गरीब परिवार ने उचित मुआवजे और कार्रवाई की मांग की है।
निष्कर्ष:
यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि क्या औद्योगिक इकाइयों में मजदूरों की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित है? क्या हर हादसे के बाद मुआवजा ही समाधान बनकर रह गया है?
