महिला आरक्षण बिल को लेकर बिहार की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधते हुए इसे महिलाओं के साथ “धोखा” करार दिया है।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति आरक्षण बिल महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए लाया गया था, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे सही दिशा में आगे बढ़ने नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी और राजद जैसे दल इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं।
सम्राट चौधरी ने कहा कि यदि यह बिल पारित हो जाता, तो लोकसभा में सांसदों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो जाती, जिनमें 216 महिलाएं होतीं। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “कुछ खास परिवारों की महिलाएं ही संसद पहुंचती हैं, आम और गरीब परिवार की महिलाओं को मौका नहीं दिया जाता।” उन्होंने अखिलेश यादव पर भी निशाना साधते हुए कहा कि “परिवारवाद के चलते आम महिलाओं का हक छीना जा रहा है।”
मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा आरक्षण के मुद्दे को टालने का काम किया है और जवाहरलाल नेहरू के समय से ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने 17 अप्रैल को “इतिहास का काला दिन” बताते हुए कहा कि एनडीए अब गांव-गांव जाकर जनता को इस मुद्दे पर जागरूक करेगा।
वहीं, बिहार सरकार की मंत्री लेशी सिंह ने भी विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कुछ परिवारों की महिलाएं ही सांसद बनती हैं, जबकि शोषित और वंचित वर्ग की महिलाएं पीछे रह जाती हैं। उन्होंने कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने से महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव आ सकता था।
सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहलता कुशवाहा ने विपक्ष पर महिलाओं के साथ धोखा करने का आरोप लगाया और कहा कि यह बिल महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने का अवसर था, जिसे गंवा दिया गया। वहीं ज्योति मांझी ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और इसे लेकर जनता के बीच जाएगी।
महिला आरक्षण बिल को लेकर अब बिहार की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी तेज होने की संभावना है, जिससे राजनीतिक दलों के बीच टकराव बढ़ सकता है।
