जम्मू-कश्मीर की हजरतबल दरगाह में अशोक स्तंभ तोड़े जाने की घटना ने राजनीति में हलचल मचा दी है। इस घटना पर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अशोक स्तंभ महज़ पत्थर का चिन्ह नहीं, बल्कि देश की एकता और अखंडता का प्रतीक है। इसका अपमान किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि कुछ कट्टरपंथी लोगों ने नमाज के बाद दरगाह प्रांगण में लगे अशोक स्तंभ को तोड़ दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
ललन सिंह की कड़ी प्रतिक्रिया
पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में ललन सिंह ने कहा—
“अशोक स्तंभ देश का गौरव है। इसका अपमान देश का अपमान है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें सख्त सजा मिलनी चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम में बुत-परस्ती की अनुमति नहीं है और धार्मिक स्थलों पर इस तरह की गतिविधियाँ स्वीकार्य नहीं हो सकतीं।
FIR और कार्रवाई की मांग
ललन सिंह ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से FIR दर्ज करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों की सुरक्षा हर हाल में की जानी चाहिए।
उमर अब्दुल्ला का बयान
इस घटना पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि धार्मिक स्थल पर सरकारी प्रतीक क्यों लगाया गया था। उमर ने कहा—
“राष्ट्रीय प्रतीक सरकारी भवनों और संस्थानों पर होते हैं, धार्मिक स्थलों पर नहीं।”
आगे की कार्रवाई पर नज़र
फिलहाल प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और दोषियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है।
