मधुबनी। बिहार के मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी थाना क्षेत्र के देवहार गांव स्थित ऐतिहासिक मुक्तेश्वर महादेव मंदिर से तीन दुर्लभ प्राचीन पुरावशेषों के गायब होने का मामला सामने आया है। इनमें गुप्तकालीन भगवान विष्णु की दुर्लभ प्रतिमा, महिषासुरमर्दिनी दुर्गा की प्राचीन मूर्ति और विष्णु प्रतिमा की पादपीठ शामिल हैं। इस मामले में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक), बिहार राज्य के को-कन्वेनर डॉ. शिव कुमार मिश्र ने मधुबनी के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर प्राथमिकी दर्ज करने तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

 

डॉ. मिश्र के अनुसार, वर्ष 2016 में मुक्तेश्वर महादेव मंदिर के पश्चिम में स्थित एक छोटे तालाब से भगवान विष्णु की एक खंडित प्रतिमा मिली थी। ऐतिहासिक महत्व वाली इस प्रतिमा को गुप्तकालीन बताया गया है और इसकी उम्र लगभग 1500 वर्ष आंकी गई है। प्रतिमा के ऐतिहासिक एवं कलात्मक महत्व का अध्ययन करने के लिए वर्ष 2017 में अमेरिका के प्रसिद्ध कला इतिहासकार और शिकागो स्थित नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के एमेरिटस प्रोफेसर डॉ. रॉब लिनरौथ भी देवहार पहुंचे थे। डॉ. मिश्र का दावा है कि बिहार में इस तरह की दुर्लभ विष्णु प्रतिमा पहले नहीं मिली थी।

इसके अलावा, मंदिर के पूर्व में स्थित एक टीले से महिषासुरमर्दिनी दुर्गा की प्रतिमा मिली थी। इसे मिथिला के कर्णाटवंशी राजाओं के काल यानी 12वीं-13वीं शताब्दी का बताया गया है। वहीं, मंदिर के सामने स्थित तालाब की खुदाई और सफाई के दौरान भगवान विष्णु की एक प्रतिमा की पादपीठ मिली थी, जिस पर विष्णु, लक्ष्मी और सरस्वती के पैरों के अवशेष मौजूद थे। डॉ. मिश्र ने आरोप लगाया है कि ये तीनों महत्वपूर्ण पुरावशेष अब गायब हैं और इन्हें मंदिर के पंडों द्वारा हटाया गया है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पक्षों का आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है।

मिथिला के इतिहास से जुड़ा है मुक्तेश्वर धाम

डॉ. शिव कुमार मिश्र ने अपने पत्र में मुक्तेश्वर महादेव मंदिर को मिथिला के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उनके अनुसार, मिथिला की प्रसिद्ध पंजी प्रबंध परंपरा की शुरुआत कर्णाटवंशी राजा हरसिंहदेव के समय इसी स्थान से जुड़ी मानी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के प्राचीन शिवलिंग को भी नष्ट कर दिया गया है और अब दुर्लभ मूर्तियों के गायब होने से इस ऐतिहासिक स्थल की विरासत पर संकट खड़ा हो गया है।

स्थानीय लोगों के हवाले से यह भी कहा गया है कि मंदिर में चढ़ावे में आई घंटियां और अन्य सामान भी गायब किए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

सरकारी संग्रहालय में सुरक्षित रखने की मांग

डॉ. मिश्र ने अपने आवेदन में कहा है कि ऐतिहासिक महत्व के पुरावशेषों को नियमानुसार सुरक्षित रखा जाना चाहिए था, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत संरक्षित रह सके। उन्होंने इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878 और बिहार पुलिस मैनुअल, 1978 का हवाला देते हुए पुरावशेषों को सुरक्षित रखने तथा मामले की जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने जिलाधिकारी से संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने और गायब प्रतिमाओं की बरामदगी के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। आवेदन की प्रतिलिपि बिहार सरकार के पुरातत्व निदेशालय के निदेशक और अंधराठाढ़ी थाना प्रभारी को भी भेजी गई है।

अब इस मामले में जिला प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यदि इन दुर्लभ प्रतिमाओं के गायब होने की पुष्टि होती है, तो यह मिथिला की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण से जुड़ा गंभीर मामला होगा।