पटना। बिहार की सियासत में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव द्वारा बिहार सरकार के मंत्री एवं महुआ विधायक संजय सिंह पर लगाए गए आरोपों के बाद मामला अब कानूनी मोर्चे तक पहुंच गया है।
तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए संजय सिंह पर दिल्ली के एक बड़े निजी होटल में महिला स्टाफ के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और शोषण के प्रयास का आरोप लगाया था। उन्होंने सरकार और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। तेज प्रताप ने यह भी दावा किया था कि मामले को रफा-दफा करने के लिए कथित तौर पर 25 लाख रुपये का लेनदेन किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
तेज प्रताप के आरोपों के बाद मंत्री संजय सिंह ने पलटवार करते हुए उन्हें 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है। संजय सिंह ने आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद, झूठा और निराधार बताया है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से उनके खिलाफ भ्रामक और आपत्तिजनक बातें प्रसारित की जा रही हैं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंच रहा है।
कानूनी नोटिस में कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट को सात दिनों के भीतर हटाने, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और भविष्य में इस तरह की टिप्पणी नहीं करने की मांग की गई है। संजय सिंह ने तेज प्रताप यादव से यह भी सवाल किया है कि सोशल मीडिया पोस्ट में जिन महिलाओं के नाम का उल्लेख किया गया है, उनसे उनका क्या संबंध है।
वहीं, तेज प्रताप यादव अपने आरोपों पर कायम हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
इस पूरे विवाद के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर तेज प्रताप यादव जांच की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर मंत्री संजय सिंह ने मानहानि का कानूनी नोटिस भेजकर आरोपों को चुनौती दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या इस मामले में कोई आधिकारिक जांच शुरू होती है और विवाद आगे किस कानूनी दिशा में जाता है।
