बिहार में स्कूलों के भगवा रंग पर सियासत तेज, शिक्षा मंत्री बोले- ‘तिरंगे में भी शामिल है भगवा’

बिहार में सरकारी स्कूलों को भगवा रंग से रंगने और मॉडल स्कूलों में मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित किए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। विधानसभा परिसर में इस विषय पर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली।

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने स्कूलों के भगवा रंग और मां सरस्वती की प्रतिमा को लेकर अपनी सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि भगवा रंग भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने सवाल किया कि जब यही रंग देश के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का भी हिस्सा है, तो इससे लोगों को आपत्ति क्यों हो रही है।

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मॉडल स्कूल विकसित कर रही है, जहां मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। उन्होंने कहा कि मां सरस्वती को परंपरागत रूप से भगवा वस्त्रों में दर्शाया जाता है, इसलिए स्कूल भवनों को भगवा रंग से रंगना पूरी तरह उचित है। उनके अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को संस्कार, संस्कृति और ज्ञान की देवी मां सरस्वती के प्रति सम्मान की भावना से जोड़ना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

वहीं विपक्ष ने सरकार के इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकारी विद्यालय सभी धर्मों और समुदायों के बच्चों के लिए होते हैं, इसलिए उन्हें किसी एक विशेष रंग या धार्मिक प्रतीक से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। विपक्ष ने इसे शिक्षा के “भगवाकरण” की कोशिश बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

इसी दौरान शिक्षा मंत्री ने बकीपुर उपचुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहे जितने आरोप लगाए, जनता का भरोसा सरकार और एनडीए के साथ है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी बकीपुर उपचुनाव में रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज करेगी।

शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों के तबादले को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जैसे ही ट्रांसफर पोर्टल खोला जाएगा, उसके बाद दो महीने के भीतर तबादला प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और निर्धारित समय सीमा के अंदर इसे पूरा किया जाएगा।

फिलहाल स्कूलों के भगवा रंग को लेकर बहस दो अलग-अलग दृष्टिकोणों के बीच केंद्रित है। सरकार इसे भारतीय संस्कृति, परंपरा और संस्कार से जोड़कर देख रही है, जबकि विपक्ष सरकारी शैक्षणिक संस्थानों की तटस्थता और धर्मनिरपेक्ष स्वरूप का हवाला देते हुए इस फैसले का विरोध कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति और विधानसभा दोनों में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

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