बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को सदन के बाहर महागठबंधन के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट पेपर लीक मामले को लेकर सरकार के खिलाफ पैदल मार्च निकालते हुए विधानसभा तक विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने केंद्र और बिहार सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनके हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर “शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो”, “पेपर लीक पर जवाब दो” और “छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो” जैसे नारे लिखे हुए थे।
महागठबंधन के नेताओं का आरोप था कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, लेकिन सरकार इस गंभीर मुद्दे पर जवाबदेही तय करने के बजाय बचने का प्रयास कर रही है। नेताओं ने कहा कि युवाओं और छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विपक्षी दलों के विधायक शहीद स्मारक से पैदल मार्च करते हुए विधानसभा पहुंचे। पूरे रास्ते सरकार के खिलाफ नारेबाजी होती रही और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई गई। प्रदर्शन के दौरान राजद विधायक गौतम कृष्ण और रणविजय साहू ने भी मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि विपक्ष पहले ही दिन इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर सरकार को छात्रों के हितों पर जवाब देने के लिए बाध्य करना चाहता है।
गौरतलब है कि बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र 24 जुलाई तक चलेगा। पहले ही दिन विपक्ष के आक्रामक तेवरों से यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी दिनों में सदन के भीतर और बाहर शिक्षा, पेपर लीक और अन्य जनहित के मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और टकराव देखने को मिल सकता है।
