सिपाही भर्ती में सेटिंग का खेल! कटिहार से सॉल्वर गैंग के दो संदिग्ध गिरफ्तार, 10 लाख में चयन कराने का आरोप
रिपोर्ट: करन कुमार, भारत वन हिंदी, कटिहार ब्यूरो।
बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित धांधली और सेटिंग के आरोपों के बीच कटिहार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सॉल्वर गैंग के दो संदिग्ध सदस्यों को गिरफ्तार किया है। दोनों के पास से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के मूल प्रमाणपत्र, भर्ती परीक्षा से जुड़े दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद होने के बाद पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई है।
कटिहार के पुलिस अधीक्षक (एसपी) परिचय कुमार ने बताया कि कुर्सेला थाना क्षेत्र के महेशपुर इलाके में वाहन जांच के दौरान पुलिस ने एक बाइक पर सवार दो युवकों को रोकने का प्रयास किया। पुलिस को देखकर दोनों भागने लगे, लेकिन पीछा कर उन्हें पकड़ लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पूर्णिया निवासी सोनू कुमार और साहिल कुमार के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान पुलिस ने उनके पास से 100 से अधिक मैट्रिक के मूल प्रमाणपत्र, कई अभ्यर्थियों के अन्य मूल दस्तावेज, विभिन्न बैंकों के ब्लैंक चेक, 500 रुपये के स्टांप पेपर, छह जिंदा कारतूस, दो मोबाइल फोन तथा बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा के कई एडमिट कार्ड बरामद किए।
पूछताछ में सामने आया भर्ती नेटवर्क
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पटना निवासी सुजीत तथा पूर्णिया निवासी मिथुन कुमार और संजय कुमार के साथ मिलकर कथित तौर पर भर्ती परीक्षाओं में सेटिंग कराने का नेटवर्क संचालित कर रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि अभ्यर्थियों से पुलिस भर्ती में चयन कराने के नाम पर प्रति अभ्यर्थी 10 लाख रुपये तक की डील की जाती थी।
पुलिस विभाग के कर्मचारी का नाम भी चर्चा में
एसपी परिचय कुमार ने बताया कि जांच के दौरान पूर्णिया के दो अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। इनमें से एक के पुलिस विभाग में कार्यरत होने की चर्चा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।
अभी जांच जारी, पुष्टि बाकी
पुलिस का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि आरोपियों ने वास्तव में किसी अभ्यर्थी की भर्ती में सेटिंग कराई थी या नहीं। फिलहाल बरामद दस्तावेजों और प्रारंभिक पूछताछ के आधार पर दोनों को सॉल्वर गैंग का संदिग्ध सदस्य मानते हुए पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं, कितने अभ्यर्थियों से पैसे लिए गए और भर्ती परीक्षाओं में इस नेटवर्क की वास्तविक भूमिका क्या रही।
