आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ निकाली गई। मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा और “जय जगन्नाथ” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा। इसी कड़ी में बिहार की राजधानी पटना और सीमांचल के पूर्णिया में भी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की भव्य रथ यात्राएं निकाली गईं, जिनमें लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर महाप्रभु के दर्शन किए और रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को धन्य महसूस किया।
पटना में इस्कॉन मंदिर से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की शुरुआत हुई। यात्रा से पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंदिर परिसर में झाड़ू लगाकर सेवा भाव का संदेश दिया। इसके बाद उन्होंने भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने भगवान जगन्नाथ से बिहार की सुख-समृद्धि और शांति की प्रार्थना की।
वहीं पूर्णिया में भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा पूरे धार्मिक वैभव के साथ निकाली गई। पूर्णिया सिटी स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने श्री श्री 108 भगवान जगन्नाथ स्वामी मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन माता सुभद्रा की रथ यात्रा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ प्रारंभ हुई। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और भक्ति भाव से रथ की रस्सी खींची। यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पुनः मंदिर परिसर पहुंची।
इसके साथ ही पूर्णिया इस्कॉन सेंटर की ओर से भी ठाकुरबाड़ी मेला ग्राउंड से भव्य रथ यात्रा निकाली गई। कीर्तन, भजन और हरिनाम संकीर्तन के बीच पूरा शहर भक्तिरस में डूब गया। मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए घंटों खड़े रहे और पुष्प वर्षा कर महाप्रभु का स्वागत किया।
पूर्णिया की महापौर विभा कुमारी भी दोनों रथ यात्राओं में शामिल हुईं। उन्होंने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना कर नगरवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। परंपरा के अनुसार उन्होंने स्वयं झाड़ू लगाकर रथ मार्ग की सफाई की और भगवान के रथ की रस्सी खींचकर अपनी श्रद्धा अर्पित की।
महापौर विभा कुमारी ने कहा कि पूर्णिया में वर्षों से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा उसी श्रद्धा और भव्यता के साथ निकाली जाती है, जैसी पुरी धाम में होती है। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा की नगर भ्रमण की इच्छा पूरी करने के लिए बड़े भाई बलभद्र के साथ रथ पर सवार होकर निकले थे और तभी से इस पावन रथ यात्रा की परंपरा चली आ रही है।
उन्होंने कहा कि रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे, सामाजिक समरसता और परिवार की एकता का संदेश देने वाला महापर्व है। भगवान के रथ की रस्सी खींचना प्रत्येक श्रद्धालु के लिए सौभाग्य का विषय माना जाता है और धार्मिक मान्यता है कि इससे जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा पुण्य की प्राप्ति होती है।
रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा के लिए विशेष सेवा शिविर भी लगाया गया, जहां ठंडा पानी, शरबत, जूस और अन्य पेय पदार्थों का वितरण किया गया। स्वयं महापौर श्रद्धालुओं की सेवा में उपस्थित रहीं। वहीं नगर निगम द्वारा यात्रा मार्ग की विशेष साफ-सफाई, ब्लीचिंग पाउडर और पानी का छिड़काव कराया गया तथा गर्मी से राहत देने के लिए वाटर फॉगिंग मशीन भी चलाई गई।
रथ यात्रा प्रारंभ होने से पहले मंदिर परिसर में खिचड़ी और खीर महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे दिन “जय जगन्नाथ” और “हरे कृष्ण” के जयघोष से वातावरण गूंजता रहा।
भगवान श्री जगन्नाथ की यह पावन रथ यात्रा एक बार फिर यह संदेश दे गई कि जब आस्था, सेवा और समरसता साथ चलती है, तब समाज में प्रेम, एकता और सद्भाव की नई ऊर्जा का संचार होता है। श्रद्धा, सेवा और भक्ति का यह महापर्व हर हृदय में विश्वास और मानवता की ज्योति प्रज्वलित करता रहे, यही महाप्रभु जगन्नाथ के श्रीचरणों में सभी भक्तों की प्रार्थना है।
