Anil Kumar Sharma, पूर्णिया। विजयादशमी के अवसर पर पूर्णिया के भट्टा दुर्गाबाड़ी में मां दुर्गा की विदाई के दौरान आस्था, परंपरा और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी सिंदूर खेला की रस्म यहां विशेष आकर्षण का केंद्र बनी। पारंपरिक परिधान में सजी महिलाओं ने मां दुर्गा के चरणों में सिंदूर अर्पित कर सुख, समृद्धि और अपने सुहाग की लंबी आयु की कामना की। इसके बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मंगलकामनाएं दीं और मां दुर्गा को भावभीनी विदाई दी।
दशहरा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, लेकिन विजयादशमी का दिन मां दुर्गा की विदाई के कारण भावुक भी हो जाता है। भट्टा दुर्गाबाड़ी में सिंदूर खेला के दौरान महिलाओं के चेहरों पर उत्सव का उल्लास दिखाई दिया, वहीं मां की विदाई के समय उनकी आंखें नम हो गईं। लाल सिंदूर की आभा से पूरा परिसर भक्तिमय और उत्सवी रंग में रंगा नजर आया।
इस पारंपरिक आयोजन की खास पहचान महिलाओं द्वारा निकाली जाने वाली उलुध्वनि भी रही। जीभ और मुंह की विशेष गति से निकाली जाने वाली यह ध्वनि बंगाली धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। महिलाओं ने उलुध्वनि के माध्यम से मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा और उत्साह प्रकट किया। इससे दुर्गाबाड़ी का वातावरण भक्तिमय हो उठा।
सिंदूर खेला के महत्व पर महिलाओं ने बताया कि यह रस्म मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ-साथ सुहाग की लंबी आयु, परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ी है। इस अवसर पर महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर प्रेम, सौहार्द और आपसी एकजुटता का संदेश भी देती हैं।
मां दुर्गा की विदाई के इस भावुक पल में भट्टा दुर्गाबाड़ी में भक्ति, परंपरा और नारी शक्ति की सुंदर झलक देखने को मिली। सिंदूर की लालिमा, पारंपरिक ध्वनि और नम आंखों के बीच श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की और उन्हें भावपूर्ण विदाई दी।
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