पंचायत चुनाव टलने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती
पटना। बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी हलचल के साथ अब कानूनी लड़ाई भी तेज हो गई है। पंचायत चुनाव को एक साल आगे बढ़ाने के फैसले को कई पूर्व मुखिया, पंचायत प्रतिनिधियों और संभावित प्रत्याशियों ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में रिट याचिका दायर कर समय पर पंचायत चुनाव कराने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें पद पर बनाए रखना संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 243-E का हवाला देते हुए कहा गया है कि पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और कार्यकाल समाप्त होने से पहले नए चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।
पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता निरंजन सिंह ने कहा कि बिहार में इसी वर्ष अक्टूबर-नवंबर के दौरान पंचायत चुनाव प्रस्तावित थे, लेकिन परिसीमन की प्रक्रिया का हवाला देते हुए चुनाव को एक साल आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। उनका दावा है कि नवंबर-दिसंबर तक मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। ऐसे में समय पर चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए थी।
अधिवक्ता के अनुसार, 21 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना के माध्यम से पंचायत चुनाव को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि परिसीमन और आगामी जनगणना को आधार बनाकर निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाना उचित नहीं है। याचिका में मामले की जल्द सुनवाई की मांग की गई है। अधिवक्ता के मुताबिक, अगले सप्ताह इस मामले पर सुनवाई होने की उम्मीद है।
वहीं, पूर्व मुखिया जितेंद्र सिंह ने भी समय पर पंचायत चुनाव कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल पांच वर्ष का निर्धारित है। यदि परिसीमन की जरूरत थी तो इसकी प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली जानी चाहिए थी।
अररिया से पहुंचे मनीष मंडल ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब विधानसभा और लोकसभा के चुनाव निर्धारित संवैधानिक समय-सीमा में कराए जाते हैं, तो पंचायत चुनाव भी समय पर होना चाहिए। उन्होंने अक्टूबर-नवंबर में ही पंचायत चुनाव कराने की मांग की।
अब इस पूरे मामले में पटना हाईकोर्ट के रुख पर सबकी नजरें टिकी हैं। अदालत की सुनवाई और आदेश के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बिहार में पंचायत चुनाव समय पर होंगे या चुनाव को आगे बढ़ाने का सरकार का फैसला बरकरार रहेगा।
